कई बार कुछ बातें सिर्फ़ कहने के लिए कही जाती है,जिनका कोई मतलब नहीं होता। लेकिन कई बार कुछ बातों का नही होते हुए भी मतलब होता है।
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गुरुवार, 9 दिसंबर 2010
मुन्नी बदनाम हुई...
पिछले महीने एक गाना लोगों की जुबां पर चढ़ बैठा। मुन्नी बदनाम हुई, डार्लिंग तेरे लिए। मुन्नी कुछ इस तरह बदनाम हुई कि सिर्फ देष में नहीं, बल्कि पाकिस्तान में भी ‘मुन्नियों’ के लिए घर से निकलना जी का जंजाल बन गया। जिधर जातीं, बदनामी पहले ही पहुंच जाती। लेकिन भैया जी कहते हैं, बदनाम हुए तो क्या नाम न होगा। लगता है भैया जी की बात सुनी जा रही है।
आजकल भ्रश्टाचार का बोलबाला है। लोकतंत्र के चारों स्तंभ किसी न किसी तरह से इसके षिकार हैं। भ्रश्टाचार की चर्चा सरेआम है। हर वो आदमी इसकी चर्चा कर रहा है, जो खुद भी भ्रश्ट है! अगर भ्रश्ट नहीं है तो मौके की फिराक में है। बस, एक बार की चाहत है, उसके बाद जरूरत ही नहीं पड़ेगी। रोज नये खुलासे। चाहे क्रिकेट का खेल हो या फिर राजनीति का। सबकुछ बिक रहा है। जमीर की तो कीमत सबसे ज्यादा है। सस्ता नहीं बिकता! जब तक लाखों करोड की बात ना हो, इसका बिकना नामुमकिन है। अपने मुलायम सिंह यादव को ही देखिए। बताया जा रहा है कि मुलायम सिंह उतने मुलायम नहीं हैं, जितने दिखते हैं। तभी तो गरीबों के हक का दो लाख करोड़ का अनाज डकार गये, और भनक तक नहीं लगने दी। वो तो लालू यादव थे जो महज नौ हजार करोड रूपये का चारा चुपचाप नहीं पचा सके। आखिर जानवरों का था, हजम भी कैसे होता। लेकिन कहते हैं ना, ज्यादा खाओ तो अपच हो जाता है, वैसा ही मुलायम सिंह के साथ होता दिख रहा है।
घोटालेबाजों के पास घोटालों का पूरा इतिहास भी है। कहते हैं आजाद भारत में पहला घोटाला जीप घोटाला था, जाहिर है, तब हम इतने आधुनिक नहीं थे। और जीप भी महंगी सवारी ही थी। इतना ही नहीं, करने वालों ने तो साइकिल आयात के नाम पर भी घोटाला किया था।
ऐसा नहीं है कि घोटाला सिर्फ नेताओं की बपौती है। अब तो सभी घोटाला कर रहे हैं। पहुंच-पहुंच की बात है। जिसके हाथ जितने लंबे हैं, वो उतना बड़ा घोटाला कर सकता है। बस आप कुछ भी हों, आम आदमी ना हों, नही ंतो आपके जिम्मे बिजली चोरी या कर चोरी जैसी छोटी चोरियां ही आएंगी, क्योंकि मोटी चोरी पर तो उनका एकाधिकार है, जो किसी न किसी तरह से रसूख वाले हैं। ये अलग बात है कि पिछले कुछ महीनों से केंद्र सरकार के मंत्री घोटालों को लेकर उतने बदनाम हो गये हैं जितनी बदनाम झंडू बाम लगाने वाली मुन्नी भी ना हुई।
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